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Raju Kumar Singh news:भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की सजा, साहेबगंज सीट पर उपचुनाव की बढ़ी संभावना; जानिए क्या कहते हैं नियम

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Alam Ki Khabar: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को चार साल की सजा सुनाई है। जानिए सदस्यता रद्द होने के नियम, उपचुनाव की संभावना और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राजू कुमार सिंह को चार वर्ष के कारावास और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता पर संकट गहरा गया है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुसार दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर विधायक की सदस्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में अब सबकी निगाहें बिहार विधानसभा सचिवालय की अगली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-II) तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2018 की न्यू ईयर पार्टी से जुड़ा है। आरोप के अनुसार 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में आयोजित समारोह के दौरान हर्ष फायरिंग हुई थी। इस दौरान डॉ. अर्चना गुप्ता गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उपचार के दौरान 3 जनवरी 2019 को उनकी मृत्यु हो गई थी।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया था कि घटना के बाद डांस फ्लोर से खून के निशान साफ कराए गए ताकि साक्ष्य प्रभावित हो सकें। इसी मामले में अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद विधायक को दोषी ठहराया।

सदस्यता पर क्यों मंडरा रहा संकट?

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार यदि किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो वह अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यदि सक्षम अदालत द्वारा सजा पर रोक (Stay on Conviction) नहीं मिलती, तो विधानसभा सचिवालय आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई कर सकता है।

यदि सदस्यता समाप्त होती है तो साहेबगंज विधानसभा सीट रिक्त घोषित होगी और निर्वाचन आयोग उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

बचाव पक्ष ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि राजू कुमार सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं और उनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने अदालत से दो वर्ष से कम सजा देने का अनुरोध किया ताकि सदस्यता पर असर न पड़े। हालांकि अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह दलील स्वीकार नहीं की।

अन्य आरोपियों पर क्या हुआ फैसला?

इस मामले में विधायक की पत्नी रेणु सिंह सहित चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि राजू कुमार सिंह को दोषी ठहराया।

गिरफ्तारी तक कैसे पहुंची थी पुलिस?

घटना के बाद पुलिस जांच के दौरान राजू कुमार सिंह की तलाश की गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार वह नेपाल जाने की कोशिश में थे, लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश के कुशीनगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया था।

जानिए सदस्यता से जुड़े प्रमुख नियम

दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर विधायक या सांसद अयोग्य घोषित हो सकता है।

यह प्रावधान जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) में है।

केवल अपील दायर करने से सदस्यता स्वतः सुरक्षित नहीं रहती।

यदि उच्च न्यायालय या सक्षम अदालत सजा पर रोक (Stay on Conviction) दे देती है, तभी सदस्यता बच सकती है।

दो वर्ष से कम सजा होने पर केवल इसी आधार पर सदस्यता समाप्त नहीं होती।

सदस्यता समाप्त होने पर व्यक्ति सजा पूरी होने के बाद भी अगले छह वर्षों तक चुनाव लड़ने के अयोग्य रह सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

वर्ष 2013 में Lily Thomas बनाम Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर सांसद और विधायक की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो सकती है। इस फैसले के बाद अपील लंबित रहने मात्र से सदस्यता बचने का प्रावधान समाप्त हो गया।

अब यदि उच्च न्यायालय से राजू कुमार सिंह को राहत नहीं मिलती है, तो साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। हालांकि अंतिम स्थिति विधानसभा सचिवालय और आगे की न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

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राजनीतिक विश्लेषण

यह फैसला केवल एक विधायक की सदस्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन का भी महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे की न्यायिक प्रक्रिया में क्या फैसला आता है और क्या साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की नौबत आती है।

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